गुरुवार, 3 नवंबर 2011

गर्भ में आना-2


 जिसका चुपके से इंतज़ार,
उसी के आने से बेख़बर
जब उसका आना, जाना !
तो अपने को पहचाना !
पर मेरी ख़ुशी किसका अफ़साना ?
क्योंकि मुझे तो अपने को बिसराना !
फिर मेरी ख़ुशी का क्या ?
बात सुन सहम गई  !
फिर ज़िद में आगे हुई  !
बहुत से सवाल-ज़वाब के साथ !
पर डर हर पल बढ़ता गया !
कि जिसने अपने को न जाना
दूसरे को पहचान देगा-क्या ?
इसी द्वन्द्व में खड़ी हूँ !
फिर भी डर-डर लड़ी हूँ !

13 टिप्‍पणियां:

शालिनी पाण्डेय ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

जिसे के इंतेज़ार में है, उसी के माध्यम से अपने को पुनः पहचान मिलेगी, फिर अपने को जाना जा सकेगा। सुंदर रचना, नए अतिथि के आगमन पर :)

डॉ.बी.बालाजी ने कहा…

बधाई अच्छी रचना है.

गर्भ में आना किसी का
माँ बनना है
और, यह कठिन तप
माँ को माँ बनाता है.

बड़ी साहसी होती है
अपने गर्भ पर उसे
गर्व होता है.

दुनिया से लड़ने का साहस देता है
जो अब तक नहीं था
वह गर्भ में किसी के आने से
उसमें आ जाता है
नए सामजिक बंधन रचना
नवीन कविता लिखना सीख जाती है माँ.

आशा है
'गर्भ में आना' से आपके जीवन में नए रचना संसार का शुभारंभ होगा.
शुभकामनाएं.:)

शालिनी पाण्डेय ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
आपकी अनमोल राय की अपेक्षा करती है हमारी यह पोस्ट-
‘‘क्या अन्ना हजारे द्वारा संचालित भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन की प्रक्रिया और कार्यपद्धति लोकतन्त्र के लिए एक चुनौती है?’’

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 28-12-2011 को चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

RITU ने कहा…

चर्चा मंच द्वारा आप तक पहुंची..सुन्दर लिखा है आपने ..
kalamdaan.blogspot.com

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

इसकी चर्चा आज[२८ दिसंबर] के चर्चा मंच पर हुई है। बधाई॥

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 29 -12 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में आज... जल कर ढहना कहाँ रुका है ?

आशा जोगळेकर ने कहा…

बहुत सुंदर कोमल प्रस्तुति ।

Vinita Sharma ने कहा…

गवाही आगमन की इन्तजारे वक्त ही देगा
पली है गर्भ में जो आत्मा जब भी यहाँ होगी
बहुत ही भावुक सरल ,सहज अभिव्यक्ति .बधाई

Vinita Sharma ने कहा…

बहुत ही भावुक सरल ,सहज अभिव्यक्ति .बधाई

Venkatesh ने कहा…

मुझे खेद है कि आपकी ये दोनों कविताएं मैंने बौट देर से देखीं। आपकी मातृ संवेदनाओं का अभिनंदन करता हूँ और आपके रचना कौशल की सराहना करता हूँ। संवेदनशील आत्माभिव्यक्ति मे वैचारिकता और भावनाओं का कलात्मक सामंजस्य कविता को अर्थवान और मर्मस्पर्शी बना गया है ।
बस यूं ही लिखते रहिए।
बधाई।
एम वेंकटेश्वर।

शालिनी पाण्डेय ने कहा…

वाह क्या बात है बहुत सुन्दर

कृपया इसे भी देखें

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